*इन बूढ़े हाथों को ज़रा ठहर कर देखिए इन पर उभरी हर नस, हर झुर्री एक कहानी कहती है*
*ज़ूम करके देखिए, क्या याद आया?*
*आपके पिता?*
*आपके दादा? या वो बुज़ुर्ग जिन्हें आपने बचपन में देवता जैसा सम्मान दिया था?*
*सोचिए उनकी उम्र जब 70–75 हुई होगी तब वो क्या करते थे?*
*शायद घर के आंगन में बैठे रामायण सुनते थे, या बच्चों के सिर पर हाथ फेरकर आशीर्वाद देते थे।*
*क्योंकि सामान्य इंसान 60 के बाद विश्राम चाहता है, शांति चाहता है… पर यह आदमी?*
*यह तो रात-दिन एक कर चुका है, अपने लिए नहीं उस भारत के लिए, जिसे हज़ारों सालों तक लूटा गया, अपमानित किया गया, बांटा गया।*
*कभी थोड़ा रुककर सोचिए कि हम में से कितने लोग 70 के बाद देश के लिए एक घंटा भी दे पाएंगे? कितने लोग बिना किसी लालच, बिना किसी पुरस्कार की चाहत के, बस देश को फिर से महान बनाने की जिद पर टिके रहेंगे?*
*इन झुर्रियों में सिर्फ उम्र नहीं, एक तपस्वी का त्याग छुपा है, इन उंगलियों में सिर्फ त्वचा नहीं, असंख्य निर्णयों का भार है जो एक-एक कर हिंदुस्तान की किस्मत बदल रहे हैं*
*देखिए और सोचिए*
*यह केवल हाथ नहीं हैं, यह भारत की थकी हुई आत्मा को फिर से जगाने वाले हाथ हैं यह भारत के भविष्य को नई दिशा देने वाले हाथ हैं*
*राजनीति को एक पल भूल जाइए, नाम और दल को अलग रखिए सिर्फ इंसानियत के चश्मे से देखिए : यह व्यक्ति आज भी 24×7 देश के लिए जी रहा है, वो भी बिना किसी शिकायत, बिना किसी छुट्टी, और बिना किसी इनाम की इच्छा के*
*मुझे नहीं पता इतिहास उन्हें कैसे याद रखेगा पर यकीन मानिए— अगर तपस्या का कोई दूसरा नाम होगा, तो वह इन हाथों की सिलवटों में मिलेगा और मैं गर्व से कहता हूं: मेरे 🇮🇳देश का भाग्य विधाता अभी भी थका नहीं है, वो अब भी चल रहा है, अब भी लड़ रहा है*
*अब भी भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने का सपना जी रहा है*
*हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी*
*एक जीवित तपस्वी*
*एक अटूट संकल्प का नाम।*
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