नई होगी धरा इक दिन,
नया ये आसमाँ इक दिन,
जहाँ से भी चलेंगे हम,
चलेगा कारवाँ इक दिन,
दिलों में याद बनकर,
रहेंगे इस तरह ज़िंदा,
हमारे बाद भी दुनिया कहेगी,
दास्ताँ इक दिन!! बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल
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